वक्रतुण्‍ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्‍नम् कुरुमेदेव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

ई-पत्रिका

अंक-3, वर्ष-1

ई-पत्रिका का पहला अंक प्रस्‍तुत है। आशा है आप सबको यह अंक पसंद आएगा। आपके सुझावों और संदेशों का स्‍वागत है।

-सुबोध कुमार
 

संरक्षक

श्री बी एस मीणा, सचिव

प्रमुख परामर्शदाता

 श्री अम्‍बुज शर्मा, संयुक्‍त सचिव

परामर्श  मंडल्र

श्री देवाशीष जैना, निदेशक
श्री एस के सिंह, उप सचिव
श्री एम आर बाली, अवर सचिव
संपादक
सुबोध कुमार, सहायक निदेशक
संपादन सहयोग
श्री लाल बाबू प्रसाद
श्री चांद वीर
कु सीमा सोनी

श्री बृजेश कुमार शर्मा

श्री धर्मेन्‍द्र सिंह

 

 

 

 

 

 

भारी उद्योग विभाग

उद्योग भवन, नई दिल्‍ली

अन्‍तर्दृष्टि

  • कष्‍ट हृदय की कसौटी है
  •                    -जयशंकर प्रसाद
  • कृतज्ञता एक कर्त्‍तव्‍य है जिसे लौटाना चाहिए किंतु जिसे पाने का किसी को अधिकार नहीं है
  •                    -रूसो
  • कीर्ति वीरोचित कार्यों की सुगंध है
  •                    - सुकरात
  • मनुष्‍य के सम्‍पूर्ण कार्य उसकी इच्‍छा के प्रतिबिंब होते हैं
  •                     - अज्ञात

 


 

                 प्रेम का मार्ग

एक बार संत रामानुज किसी गांव से गुजर रहे थेý चानक उन्‍हें एक व्‍यक्ति दौडकर आता  हुआ दिखाý व़ह उन्‍हीं की तरफ आ रहा थाý थोडी ही देर में वह उनके पास पहुंचा और उनके पैरों पर गिरकर कहने लगा, 'महाराज, मुझे ईश्‍वर से मिला दीजिएý' ऱामानुज ने उसे उठाया  और कहा,'निश्‍चय ही मैं तुम्‍हें ईश्‍वर से मिला दूंगा, लेकिन पहले यह बताओ कि क्‍या तुमने कभी किसी से प्रेम किया हैý  व़ह बोला, नहीं महाराज, मुझे तो केवल ईश्‍वर से प्रम है, मैं किसी मनुष्‍य से प्रेम कैसे कर सकता हूँý ऱामानुज ने दोहराया, याद करो, शायद कभी किसी से प्रम हुआ होý व्‍यक्ति ने पुन: कहा, मैने कहा न कि मेरा ईश्‍वर केअलावा किसी और से प्रेम हुआ ही नहींý मैं तो किसी और चीज से मतलब ही नहीं रखताý रामानुज से दुबारा पूछा-"प्रकृति से, किसी स्‍त्री, पुरुष या बच्‍चे से, किसी अन्‍य प्राणी से अथवा स्‍वयं से ही कभी तो प्रेम हुआ होगाý' उस व्‍यक्ति ने आश्‍वस्‍त होकर कहा , नहीं, कभी नहीं ý  ऱामानुज बोले, तब तुम ईश्‍वर से नहीं मिल सकते क्‍योंकि वह स्‍वयं प्रेम का प्‍यास है, प्रेम के ही वश में है और प्रेम ही उसका स्‍वरूप है ý ज्रब तुम प्रेम की एक बूंद भी न पा सके तो प्रेम के उस महासागर तककैसे पहुंचोगे ý जब तुमने एक किरण भी नहीं देखी तो सूर्य को कैसे देखोगे ý बिना प्रेम के ईश्‍वर को पाना असंभव है ý जाओ पहले प्रेम करना सीखो ý


व़ाक्‍यांश और उनके हिंदी अर्थ

Above Mentioed

उपर्युक्‍त

Above Resolution be Published in the gazette

उपर्युक्‍त संकल्‍प भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाए

A brief note is placed below

संक्षिप्‍त नोट नीचे दिया है

Acceptable Propossal

स्‍वीकार्य प्रस्‍ताव

Accepted for Payment

भुगतान के लिए स्‍वीकृत

Accountancy Expenses

लेखाकरण व्‍यय

Action is Underway

कार्रवाई की जा रही है

Action may be taken as proposed

यथा प्रस्‍तावित कार्रवाई की जाए

Administrative approval may be obtained

प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्‍त किया जाए

 
                                     

विभाग में तैनाती

नाम्

पदनाम्

तिथि

श्री एस जैनेन्‍द्र कुमार , निदेशक 01/10/2010
श्री यू के मुखर्जी अवर सचिव 01/10/2010
श्री धरमवीर सिंह उच्‍च श्रेणी लिपिक  30/09/2010
श्री बी डी भारद्वाज आशुलिपिक ग्रेड सी 30/09/2010
श्री एस एस महलावत उप सचिव 13/10/2010
श्रीमती मनोरमा कौल अनुभाग अधिकारी 01/10/2010
श्रीमती ऊषा पहवा आशुलिपिक ग्रेड सीिव 18/10/2010

 

विभाग से स्‍थानांतरण

नाम् पदनाम तिथि
श्री मनोहर लाला सिक्‍का अवर सचिव 04/10/2010
श्रीमती शारदा खन्‍ना आशुलिपिक ग्रेड सी 19/10/2010
श्रीमती ब्‍यापत कुमारी सेठी अनुभाग अधिकारी 20/10/2010
श्रीमती कृपा एन्‍ना एक्‍का अनुभाग अधिकारी 20/10/2010
श्री ज्‍योति कलश निदेशक 01/11/2010
श्री घनश्‍याम देवनानी अवर सचिव 18/11/2010
श्री जी लक्ष्‍मण राव आशुलिपिक ग्रेड सी 30/11/2010

                                                                   
 

धन्यवाद!